ड्रोन दिखने का सिलसिला जारी, एक इंटरनेशनल बार्डर पर तो दूसरा वायुसेना हवाई अड्डे पर आया नजर

भारतीय सीमा के अंदर ड्रोन दिखने का सिलसिला लगातार जारी है। शुक्रवार को भारतीय सीमा के अंदर दो जगहों में फिर से ड्रोन देखें गए।
 
Drone

भारतीय सीमा के अंदर ड्रोन दिखने का सिलसिला लगातार जारी है। शुक्रवार को भारतीय सीमा के अंदर दो जगहों में फिर से ड्रोन देखें गए। पहला तो जम्मू के इंटरनेशनल बार्डर पर अरनिया सेक्टर में पाकिस्तान का ड्रोन दिखाई दिया। वहीं, दूसरा ड्रोन जम्मू के वायुसेना स्टेशन पर फिर से देखा गया। दोनों ही मामलों में सेनाओं ने ड्रोन को खदेड़ दिया। 

अरनिया सेक्टर में सुबह 5 बजे के करीब पाकिस्तान का खुफिया ड्रोन देखा गया। बीएसएफ के जवानों की नजर जैसे ही ड्रोन पर पड़ी तो जवानों ने गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। जिसके बाद ड्रोन वापस पाकिस्तान के सीमा में लौट गया। जानकारी के अनुसार जबोवाल पोस्ट पर सीमा के पास तड़के सुबह 5 बजे ड्रोन दिखाई दिया। यह ड्रोन पाकिस्तान की सीमा से उड़ता हुआ भारत की सीमा में दाखिल हुआ। जैसे ही ड्रोन भारतीय सीमा में दाखिल हुआ तो जवानों ने 25 राउंड फायरिंग की तो ड्रोन वापस लौट गया।

इस घटना के बाद से सुरक्षा एजेंसियों ने बीएसएफ के जवानों के साथ तलाशी अभियान छेड़ दिया है। आशंका जताई जा रही है कि ड्रोन के जरिए पाकिस्तान  भारत मे हथियार या नशीला पदार्थ भेजवा रहा है। फिलहाल में सर्च आपरेशन जारी है।

वहीं, दूसरी ओर 6 दिन बाद फिर से के वायुसेना स्टेशन पर रात 12:45 मिनट पर ड्रोन उड़ता हुआ देखा गया। कमांडो ने जैसे ही कार्रवाई करने की कोशिश की तो ड्रोन पालक झपकते ही गायब हो गया। एयरफोर्स की तरफ से पुलिस को भी सूचना दी गई। लेकिन पुलिस जैसे ही मौके पर पहुंची तो ड्रोन गायब हो चुका था। आसपास के इलाकों में सुबह 3 बजे तक सर्च आपरेशन चलाया गया लेकिन ड्रोन का कोई सुराग नहीं मिला। 

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बता दें कि अभी हाल ही में इस आतंकी गतिविधियों पर रोक लगाने की हैसियत से प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक की गई। जिसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सहित अन्य लोगों ने शिरकत की। 

बैठक में आतंकी हमले से बचने के लिये ड्रोन विरोधी नीति तैयार की गई है। सूत्रों से मिली जनलारी के अनुसार उत्तरी पश्चिमी क्षेत्र में काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैयार किया जा रहा है। वहीं, अब इस तरह की तकनीक से निपटने के लिए वायुसेना में नोडल एजेंसियों का सहारा लिया जाएगा। 

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