इतिहास

Cat Temple: भारत के इस मंदिर में होती है बिल्लियों की पूजा, १००० साल पुरानी है परंपरा; क्या आप कारण जानते हैं?

Sudarshan Kendre
20 Jan 2023 7:15 AM GMT
Cat Temple: Cats are worshiped in this temple of India, a 1000-year-old tradition; Do you know the reason?
x

Cat Temple: Cats are worshiped in this temple of India, a 1000-year-old tradition; Do you know the reason?

मंगम्मा टेम्पल इन कर्नाटक: भारत धार्मिक विश्वास और परंपरा पर चलने वाला देश है। हमारे देश के अलग-अलग कोनों में अलग-अलग तरह की परंपराएं देखी जाती हैं। भारत में पेड़ों, पहाड़ों, नदियों और कई अन्य चीजों की पूजा की जाती है। इसका भारतीय जीवन से गहरा संबंध है। भारत में लोग अपने देवता और उनके वाहन की भी पूजा करते हैं। श्री गणेश के वाहन के साथ-साथ कई जगहों पर चूहे की भी पूजा की जाती है। साथ ही उल्लू का एक पवित्र स्थान है क्योंकि यह देवी लक्ष्मी का वाहन है। शेर दुर्गामाता का वाहन है इसलिए मंदिर में शेर की भी पूजा की जाती है।

इस मंदिर में बिल्लियों की पूजा की जाती है........

इसी बीच कुछ रिवाजों के अनुसार कुछ जानवरों को अशुभ माना जाता है। इन्हीं जानवरों में से एक है बिल्ली। आज की आधुनिक दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो इस अंधविश्वास का पालन करते हैं,कि बिल्ली का रास्ता काटना मतलब अपशकुन होता है। लेकिन भारत में एक जगह इस बिल्ली की पूजा की जाती है। एक बिल्ली मंदिर भी है जी, हाँ ये सच है। कुछ लोग बिल्लियों को अशुभ मानते हैं। हालांकि, कई लोग बिल्लियां पालते हैं। लेकिन भारत में एक जगह बिल्ली का मंदिर है और प्राचीन काल से यहां इसकी पूजा की जाती है।

१००० साल से बिल्ली की पूजा होती आ रही है..........

यह कर्नाटक में एक प्राचीन बिल्ली मंदिर है। यह जगह कर्नाटक के मांड्या जिले में है। बेक्कलेले नाम का एक गाँव है। इस गांव के लोग पिछले 1000 साल से बिल्ली की पूजा करते आ रहे हैं। यहां रहने वाले लोगों का मानना ​​है कि बिल्ली देवी का अवतार है, इसलिए वे यहां पूरे विधि-विधान से बिल्ली की पूजा करते हैं। इस गांव के लोग बिल्लियों को मनगम्मा देवी का रूप मानते हैं।

बिल्ली को देवी का स्थान प्राप्त है

बेक्कले गांव में यह मंदिर पिछले 1000 साल से है और वहां आज भी बिल्लियों की पूजा की जाती है। इस गांव के लोग मनगम्मा देवी को अपनी देवी मानते हैं। इस वजह से गांव में कोई भी देवी के रूप के कारण बिल्लियों को नुकसान पहुंचाता है, तो उन्हें गांव से निकाल दिया जाता है। इस गांव में अगर बिल्ली भी मर जाती है,तो उसे दफना दिया जाता है।

कैसे शुरू हुई 'यह' परंपरा?

इस गांव के लोगों का कहना है,कि सैकड़ों साल पहले इस पूरे गांव में बुरी ताकतों का साया था। जब यहां अनिष्ट शक्तियों का प्रकोप हुआ तो मनगम्मा देवी बिल्ली का रूप धारण कर के गांव में आईं और देवी ने अनिष्ट शक्तियों का नाश किया। उसके बाद देवी मंगम्मा अचानक इस गांव से गायब हो गईं और यहां एक स्थान पर अपनी छाप छोड़ गईं। उनका मंदिर बाद में उसी स्थान पर बनाया गया था और तब से लोग यहां बिल्लियों की पूजा करते आ रहे हैं।

Next Story