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वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही के लिए PPF और NSC जैसी योजनायों की ब्याज दर क्या होगी? जानें

Ankit Singh
1 April 2022 7:25 AM GMT
वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही के लिए PPF और NSC जैसी योजनायों की ब्याज दर क्या होगी? जानें
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Small Savings Scheme: वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2023 की जून तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों का ऐलान कर दिया है, तो आइए जानते है कि PPF और NSC जैसी योजनायों की ब्याज दर क्या होगी।

Small Savings Scheme Interest Rates: वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2023 की जून तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। स्माल सेविंग इंस्ट्रूमेंट में पब्लिक प्रोविडेंट फंड खाता (PPF), सुकन्या समृद्धि एकाउंट, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, डाकघर बचत खाता (5 साल), पोस्ट ऑफिस रेकररिंग डिपॉइट एकाउंट (RD), नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) शामिल है।

फाइनेंसियल ईयर 2022-23 की पहली तिमाही के लिए विभिन्न स्माल सेविंग स्कीम पर ब्याज दर, 1 अप्रैल 2022 से शुरू होकर 30 जून, 2022 को समाप्त होने वाली, चौथी तिमाही (1 जनवरी 2022) के लिए लागू वर्तमान दरों से अपरिवर्तित रहेगी।

PPF, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, NSC की ब्याज दरें

वित्त मंत्रालय की ताजा सूचना के मुताबिक, PPF पर 7.1 फीसदी ब्याज मिलता रहेगा। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) 7.40 प्रतिशत और पोस्ट ऑफिस टाइम डिपाजिट 5.5-6.7 प्रतिशत अर्जित करती रहेगी। NSC या नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट के लिए ब्याज 6.8 फीसदी तय किया गया है। पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम या MIS पर अब 6.6 फीसदी ब्याज मिलेगा। डाकघर 5 साल की फिक्स्ड डिपाजिट पर 6.7 प्रतिशत ब्याज मिलता रहेगा जबकि 5 साल की रेकररिंग डिपाजिट पर 5.8 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। ब्याज दरें 1 अप्रैल, 2022 से 30 जून, 2022 तक लागू रहेंगी।

फिक्स्ड इनकम निवेशकों के लिए अच्छी खबर

पिछले वर्षों में फिक्स्ड डिपाजिट जैसे ट्रेडिशनल सेविंग ऑप्शन पर ब्याज की गिरती दर के साथ, निवेशक छोटी बचत योजनाओं की ओर आकर्षित होते हैं क्योंकि वे उच्च रिटर्न प्रदान करते हैं। सरकार ने छोटी बचत योजना की ब्याज दरों को ऐसे समय में बनाए रखा जब बैंक की फिक्स्ड डिपाजिट दरें अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के लिए वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ब्याज दर को 40 साल के निचले स्तर 8.1 प्रतिशत तक घटा दिया है। इस फैसले से मध्यम वर्ग के निवेशकों को काफी राहत मिलेगी जो फिक्स्ड इनकम के साधनों पर भरोसा करते हैं।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर में 1.1 प्रतिशत की कटौती की गई थी लेकिन विरोध के बाद सरकार ने इसे गलती से हुआ बताकर, वापस ले लिया था। हालांकि, इस बार भी ब्याज दरों में कटौती की आशंका जाहिर की जा रही थी लेकिन एक बार फिर सरकार ने इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। बता दें कि केंद्र सरकार हर तिमाही में छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों की समीक्षा करती है।

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