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Credit Report Kya Hai? | लोन लेते वक्त यह कैसे बहुत जरूरी हो जाता है और यह कैसे बनता है? जानें

Ankit Singh
24 Jan 2022 6:32 AM GMT
Credit Report Kya Hai? | लोन लेते वक्त यह कैसे बहुत जरूरी हो जाता है और यह कैसे बनता है? जानें
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Credit Report in Hindi: अगर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते है तो आपने सिबिल स्कोर या क्रेडिट स्कोर जैसे शब्द सुने होंगे लेकिन क्या आप जानते है Credit Report Kya Hai? (What is Credit Report in Hindi) यह सुनने में तो क्रेडिट कार्ड के बाकी टर्म जैसा लगता है, लेकिन यह बाकी सबसे थोड़ा अलग है। तो चलिए जानते है Credit Report kya Hota Hai?

Credit Report in Hindi: क्रेडिट रिपोर्ट को विस्तार से समझने से पहले, आइए कुछ महत्वपूर्ण चीजों पर एक नज़र डालें जिन्हें आपको क्रेडिट रिपोर्ट (Credit Report) के बारे में पता होना चाहिए-

  • क्रेडिट रिपोर्ट मूल रूप से यूजर के वित्तीय इतिहास (Financial history) का एक स्नैपशॉट है।
  • यह एक ऐसा प्राइमरी टूल है जिसके माध्यम से लोन देने वाले बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनियां यह तय करती हैं कि आपको क्रेडिट देना है या नहीं।
  • एक एरर फ्री Credit Report बेहतर Credit Score प्राप्त करने में मदद करता है।
  • अपने क्रेडिट की पूर्ण और सही जानकारी के लिए यूजर को Credit Report का ट्रैक रखना चाहिए।

Credit Report kya Hai? | What is Credit Report in Hindi

Credit Report in Hindi: एक Credit Report यूजर के क्रेडिट हिस्ट्री का एक संक्षिप्त लेखा-जोखा होता है, जिसमें यह दर्शाया जाता है कि उसने क्रेडिट एकाउंट, पेमेंट हिस्ट्री, बकाया शेष राशि, पिछले ऋण आदि को कैसे मैनेज किया है। यह यूजर के पर्सनल और प्रोफेशनल जानकारी जैसे पता, जन्म तिथि का , पैन डिटेल, एम्प्लॉयमेंट हिस्ट्री, बैंकों या क्रेडिट कार्ड खातों के प्रकार, बकाया शेष राशि, देरी से किया गया भुगतान, आदि का एक कॉम्बिनेशन होता है। कुल मिलाकर एक Credit Report यूजर के क्रेडिट हिस्ट्री और संबंधित डेटा को व्यक्त करता है।

क्रेडिट रिपोर्ट महत्वपूर्ण क्यों होता है? | Why is a Credit Report Important?

  1. यह लेनदारों या अन्य वित्तीय संस्थानों को यह पुष्टि करने में मदद करता है कि आवेदक को क्रेडिट या ऋण प्रदान करना है या नहीं और किन शर्तों पर।
  2. आवेदक को नियुक्त करना है या नहीं, यह तय करने के लिए भी कर्मचारियों द्वारा क्रेडिट रिपोर्ट का उपयोग किया जाता है।
  3. इसका उपयोग बीमा कंपनियों द्वारा यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि आवेदक को बीमा प्रदान करना है या नहीं।
  4. कई जगहों पर मकान मालिक भी Credit Report का उपयोग यह देखने के लिए करते है कि अपार्टमेंट रेंट पर देना है या नहीं।
  5. इसके अलावा और भी कई सेवाएं देने वाली कंपनी यूजर के Credit Report को देखकर यह तय करती है किये आवेदक को सेवाएं देनी या नहीं।

क्रेडिट रिपोर्ट में क्या होता है? | What Happens in a Credit Report?

निम्नलिखित जानकारी का विश्लेषण करने के बाद एक Credit Report तैयार की जाती है-

पर्सनल डिटेल

  • आवेदक का नाम, आवेदक का वैकल्पिक नाम अगर पूर्व में क्रेडिट आवेदनों के लिए उपयोग किया गया हो
  • जन्म की तारीख
  • क्रेडिट खातों से जुड़े आवेदक का पता
  • आवेदक के क्रेडिट अकाउंट से जुड़ा कांटेक्ट डिटेल
  • वर्तमान और पूर्व कंपनी

एकाउंट डिटेल

  • क्रेडिट एकाउंट की डिटेल
  • लेनदार/ऋणदाता का नाम
  • एकाउंट खोलने और बंद करने की तिथि
  • क्रेडिट पेमेंट स्टेटस
  • लोन और क्रेडिट कार्ड के लिए क्रेडिट लिमिट
  • खाते में कुल शेष
  • पेमेंट हिस्ट्री
  • किराये के पट्टे (Rental leases)

इन्क्वायरी

  • हार्ड इंक्वायरी और सॉफ्ट इंक्वायरी की कुल संख्या

क्रेडिट रिपोर्ट कैसे बनाई जाती है? | How is the Credit Report Created?

भारत के क्रेडिट ब्यूरो उधार लेने वाले व्यक्तियों के क्रेडिट डेटाबेस को मैनेज और अपडेट करते है। उधार देने वाली संस्था या बैंक से सभी क्रेडिट-आधारित जानकारी से एकत्र की जाती है और क्रेडिट ब्यूरो डेटाबेस में संग्रहीत की जाती है। एकत्रित जानकारी का उपयोग करके, ब्यूरो फिर उधारकर्ता की एक विस्तृत Credit Report तैयार करता है।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि Credit Report एक ठोस रिपोर्ट नहीं है। वास्तव में यह उधारकर्ताओं की नई जानकारी और क्रेडिट एक्टिविटीज के चल रहे रिकॉर्ड को शो करता है।

Credit Report में उधारकर्ता का संवेदनशील डेटा होता है, इसलिए इसे कोई भी व्यक्ति एक्सेस नहीं कर सकता है। क्रेडिट ब्यूरो सिर्फ निम्नलिखित को क्रेडिट रिपोर्ट प्रदान करते हैं-

  • ऋणदाता जिन्होंने उधारकर्ता को ऋण प्रदान किया है।
  • उधारकर्ता का कंपनी या या पुरानी कंपनी। (अगर उधारकर्ता सहमत है)
  • ऋणदाता जिनसे उधारकर्ता कर्ज मांग रहा है।
  • बीमा कंपनियां जो उधारकर्ता को बीमा पॉलिसी जारी कर सकती हैं।
  • उधारकर्ता को सेवाएं प्रदान करने का निर्णय लेने के लिए टेलीफोन कंपनियां।
  • सरकारी एजेंसियां ​​जो उधारकर्ता की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना चाहेंगी।

उधारकर्ता के रिटेन रिक्वेस्ट पर एक Credit Report को थर्ड पार्टी के साथ भी शेयर किया जा सकता है। इसके अलावा कोर्ट के आदेशों पर भी क्रेडिट ब्यूरो उधारकर्ता की Credit Report प्रस्तुत कर सकता है।

क्रेडिट रिपोर्ट को प्रभावित करने वाले कारक | Factors Affecting Credit Report

व्यक्तिगत जानकारी के अलावा, कई कारक हैं जो क्रेडिट रिपोर्ट को प्रभावित करते हैं। उनमें से कुछ नीचे दिए गए हैं-

  • अनियमित पेमेंट हिस्ट्री
  • देर से किया गया पेमेंट
  • बकाया शेष
  • आधे-अधूरे पेमेंट
  • रिपोर्ट में एरर
  • हार्ड इन्क्वायरी
  • अनुपात का अधिक क्रेडिट उपयोग

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