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Types of SIPs in Hindi: म्यूच्यूअल फंड के SIP कितने तरह के होते है? यह कैसे काम करते है, जानें

Ankit Singh
3 Feb 2022 5:18 AM GMT
Types of SIPs in Hindi: म्यूच्यूअल फंड के SIP कितने तरह के होते है? यह कैसे काम करते है, जानें
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Types of SIPs in Hindi: सिप के जरिए नियमित रूप से निवेश करने में मदद मिलती है। यह निवेश में जोखिम को भी घटाता है। आज इस लेख में समझते है कि SIP कितने प्रकार के होते है? (What are the Different Types of SIPs?)

Types of SIPs: म्यूच्यूअल फंड में SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए निवेश ने बहुत लोकप्रियता हासिल कर ली है। बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान एकमुश्त निवेश के बजाय, SIP निवेशकों को पूरे बिजनेस साईकल में निवेश करने और लागत को समान रूप से डिस्ट्रीब्यूट करने की अनुमति देता है। इसके अलावा यह रिस्क को बैलेंस करता है और लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देता है। एक अतिरिक्त लाभ यह है कि SIP लचीले होते हैं। आप उन्हें जब चाहें रोक सकते हैं, आपात स्थिति में आप पेमेंट करना भी छोड़ भी सकते हैं। कुछ SIP आपको EMI की राशि बदलने की सुविधा भी देते हैं।

अगर निवेश की यात्रा में आप नए है तो सलाह यही दी जाती है कि म्यूच्यूअल फंड में SIP के जरिए ही निवेश करें। लेकिन निवेश से पहले आपको SIP के बारे में यह समझना चाहिए कि SIP कितने तरह के होते है? (What are the types of SIP in Hindi) आपको उसी के अनुसार निवेश पोर्टफोलियो की योजना बनानी चाहिए। तो चलिए आज के लेख में SIP के प्रकार (Types of SIP in Hindi) पर चर्चा करते है।

SIP के विभिन्न प्रकार क्या हैं? | What are the Different Types of SIPs?

Mutual Fund में SIP एक एक ऐसा जरिया है जिसके जरिये निवेशक एकमुश्त पैसा न लगाकर किस्तों में पैसा इन्वेस्ट करते है। एसआईपी को निवेश के उद्देश्य और फंड एलोकेशन के साथ-साथ किस्त के प्रकार के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है। नीचे विभिन्न प्रकार के SIP के बारे में बताया गया है।

एसआईपी के प्रकार | Types of SIP in Hindi

1. रेगुलर एसआईपी (Regular SIP)

इस तरह के SIP में निवेशक किश्तों के लिए एक राशि तय करते हैं और उसे चुकाते रहते हैं। वे बैंक को स्थायी निर्देश देते हैं या बैंक से SIP खाते में धन के लिए ऑटो पे को एक्टिवेट करते है। यह एक परेशानी मुक्त प्रक्रिया है क्योंकि आपको नियमित रूप से इसपर ध्यान नहीं देना होता है। बाजार में उछाल और गोता लगाने के दौरान समान राशि का निवेश किया जाता है। यह खरीदी गई SIP इकाइयों की लागत का औसत निकालता है।

2. फ्लेक्सिबल एसआईपी (Flexible SIP)

जैसा कि नाम से पता चलता है यह आवश्यकता के अनुसार SIP राशि को बदलने की सुविधा प्रदान करता है। आप अधिक निवेश कर सकते हैं जब बाजार अधिक इकाइयों को खरीदने के लिए नीचे होता है। इसमें निवेशक पहली इंस्टॉलमेंट फिक्स कर देता है। बाद की इंस्टॉलमेंट फॉर्मूले के आधार पर कैलकुलेट की जाती हैं।

बाजार की स्थितियों की तरह आप अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार किस्त की राशि में भी बदलाव कर सकते हैं। वित्तीय संकट से गुजरते समय आप राशि कम कर सकते हैं और जब आप ठीक कर रहे हों तो आप राशि बढ़ा सकते हैं। याद रखें किसी भी बदलाव के लिए कटौती की तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले फंड हाउस को सूचित करना होता है। इसे फ्लेक्सी-सिप (Flexi SIP) या फ्लेक्स-एसआईपी (Flex SIP) भी कहा जाता है।

3. स्टेप-अप एसआईपी (Step-up SIP)

इसे टॉप-अप एसआईपी के रूप में भी जाना जाता है, इस तरह की योजना निवेशकों को नियमित अंतराल पर SIP राशि बढ़ाने में सक्षम बनाती है। आप एक निश्चित राशि के साथ SIP शुरू कर सकते हैं और उस पर नियमित टॉप-अप का विकल्प चुन सकते हैं।

उदाहरण के लिए आप 5000 रुपये के साथ मासिक SIP शुरू करते हैं। लेकिन बाद में आप फंड हाउस से इसे 1000 रुपये 12 महीने तक बढ़ाने के लिए कह सकते हैं। निवेश की रकम कितनी और कब बढ़ानी है यह निवेशक पहले ही तय कर लेता है। यह उन वेतनभोगी लोगों के लिए अच्छा है जिनका वार्षिक आधार पर इंक्रीमेंट होता है।

4. परपेचुअल एसआईपी (Perpetual SIP)

अधिकांश SIP में निवेशकों को उस कार्यकाल की घोषणा करने की आवश्यकता होती है, जिसमें वे निवेशित रहना चाहते हैं, जैसे कि 3 साल या 5 साल या उससे अधिक के लिए। परपेचुअल SIP के लिए आपको शुरुआत की तारीख का उल्लेख करना होगा लेकिन SIP के लिए अंतिम तिथि या कार्यकाल का उल्लेख करना जरूरी नहीं। जब निवेशक मेच्योरोटी पीरियड का उल्लेख नहीं करते हैं तो इसे एक Perpetual SIP माना जाता है। इसका मतलब है कि SIP तब तक जारी रहेगा जब तक निवेशक फंड हाउस या AMC से एसआईपी को रोकने का अनुरोध नहीं करता है।

अगर निवेशक मैच्योरिटी डेट के अंदर SIP में योगदान को सीमित नहीं करना चाहता है और लंबी अवधि के लिए जारी रखना चाहता है तो वो Perpetual SIP का विकल्प चुन सकते हैं। वे एसआईपी फॉर्म में अंतिम तिथि को छोड़ सकते हैं और जब चाहें योजना को भुना सकते हैं।

5. ट्रिगर एसआईपी (Trigger SIP)

ट्रिगर SIP केवल उन निवेशकों के लिए बढ़िया है जो बाजार के उतार चढ़ाव से अच्छी तरह वाकिफ हैं। इस प्रकार के SIP में यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है Sell और Buy कब करना है। इस प्रकार के SIP के तहत निवेशक अपनी एसआईपी प्रारंभ तिथि निर्धारित कर सकते हैं और बाजार का मूल्य घटने पर SIP रिडीम या स्विच कर सकते हैं। यह अनुभवी निवेशकों के लिए उचित है जो बाजार की गतिविधियों की भविष्यवाणी कर सकते हैं और चयनित घटनाओं के लिए ऐसे ट्रिगर सेट करने की विशेषज्ञता रखते हैं।

यह मुख्य रूप से अटकलों पर आधारित है और इसलिए किसी को बाजारों का अच्छा ज्ञान और अनुभव होना चाहिए। आप प्रभावी ढंग से ट्रिगर सेट कर सकते हैं अगर आप बाजार की गतिशीलता को समझते हैं और जानते हैं कि एसआईपी की इकाइयों को कब खरीदना या बेचना है।

6. मल्टी एसआईपी (Multi SIP)

यह निवेशकों को एक SIP के माध्यम से एक फंडहाउस के कई फंडों में निवेश करने की अनुमति देता है। उदाहरण के लिए अगर आप मल्टी SIP में मासिक 2000 रुपये मासिक का निवेश करते हैं तो यह 500 रुपये की 4 इकाइयों को खरीदकर आपके निवेश को विभाजित कर सकता है। इससे निवेशकों को अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह कागजी कार्रवाई की संख्या को भी कम करता है। निवेशक अपनी SIP योजना शुरू करने के लिए एक फर्म को भुगतान का निर्देश दे सकते हैं।

निवेशकों को किस प्रकार का एसआईपी चुनना चाहिए? | Which Type of SIP should Investors Pick?

सभी प्रकार के SIP अपने आप में खास होते है, लेकिन यह इन्वेस्टर्स अपने जरूरत के हिसाब से तय करता है कि उसे कौन सा SIP चुनना है। जो लोग टैक्स बेनिफिट का लाभ लेना चाहते है वह ELLS में निवेश कर सकते है। इसी तरह अगर आप बिना किसी हस्तक्षेप के नियमित अंतराल पर SIP राशि बढ़ाना चाहते हैं, तो आप टॉप-अप एसआईपी के लिए जा सकते हैं। SIP का प्रकार चुनने से पहले निवेशकों को निम्नलिखित कारकों की जांच करनी चाहिए।

  • निवेशकों को अपने इम्वेस्टमेंट गोल की तुलना SIP से करनी चाहिए।
  • इंवेटर्स को SIP के जोखिम मानकों की तुलना अपनी जोखिम लेने की क्षमता से भी करनी चाहिए।
  • SIP में निवेश करने से पहले उसकी मैच्योरिटी पेरिपड पर ध्यान जरूर दें।
  • SIP के परफॉरमेंस और ट्रैक रिकॉर्ड की जांच करें।
  • योजना बनाएं कि किस प्रकार का SIP आपकी वित्तीय स्थिति के अनुकूल है और उस हिसाब से SIP चुनें।

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