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कम रिस्‍क में बेहतर रिटर्न चाहते है तो Hybrid Fund में करें निवेश, लेकिन पहले जान लें ये 6 जरूरी बातें

Ankit Singh
5 Jun 2022 11:30 AM GMT
कम रिस्‍क में बेहतर रिटर्न चाहते है तो Hybrid Fund में करें निवेश, लेकिन पहले जान लें ये 6 जरूरी बातें
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Hybrid Mutual Fund: हमेशा सलाह दी जाती है कि इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन जरूरी है, लेकिन आपके पास इसके लिए समय नहीं तो आप Hybrid Fund में निवेश कर सकते है। लेकिन हाइब्रिड फंड में निवेश से पहले कुछ जरूरी बातें जो हर निवेशक को पता होनी चाहिए।

Hybrid Mutual Fund: हमेशा यह सलाह दी जाती है, 'एक ही टोकरी में सभी अंडे नहीं रखने चाहिए।' यह सलाह निवेश की दुनिया में भी अच्छी तरह से काम करती है, क्योंकि निवेशकों के लिए कोई भी एसेट क्लास हमेशा विजेता नहीं रहा है। इसलिए ज्यादातर समझदार निवेशक अलग अलग एसेट क्लास में निवेश करना पसंद करते है, इससे निवेश में विविधता आती है।

यह उन्हें बेहतर रिटर्न के साथ लाभ उठाने में सक्षम बनाता है और साथ ही रिस्क को बांटने में भी मदद करता है, नतीजन कम जोखिम होता है। एक विविध पोर्टफोलियो रखने के प्रयास में एक निवेशक अलग अलग एसेट क्लास में निवेश करने वाली कई स्कीम्स रख सकता है। लेकिन ऐसे बहुत से निवेशक है जिनके पास इतना समय नहीं होता है और न ही उन्हें इसकी समझ होती है। ऐसे समय में हाइब्रिड फंड (Hybrid Fund) निवेशकों के बचाव में आते हैं। Hybrid Mutual Fund किसी भी स्कीम के भीतर डेट और इक्विटी सिक्योरिटीज दोनों में निवेश करने में मदद करते है।

यहां छह चीजें हैं जो आपको हाइब्रिड म्यूचुअल फंड के बारे में जाननी चाहिए-

1) निवेश पैटर्न

हाइब्रिड फंड ऐसे फंड होते हैं जो इक्विटी मार्केट और डेट सिक्योरिटीज में एक साथ निवेश करने के लचीलेपन का आनंद लेते हैं। इक्विटी कंपोनेंट हाई रिटर्न की लंबी अवधि की क्षमता के साथ मदद करता है, जबकि डेट कंपोनेंट पोर्टफोलियो को स्थिरता प्रदान कर सकता है।

इसके अलावा, हाइब्रिड फंड अन्य परिसंपत्ति वर्गों में भी निवेश कर सकते हैं, जैसे कि रियल एस्टेट, सोना, आदि, उनके निवेश के आधार पर।

2) हाइब्रिड फंड के तहत विभिन्न म्युचुअल फंड योजनाएं

एक निवेशक conservative/बैलेंस्ड/एग्रेसिव हाइब्रिड फंड, डायनेमिक एसेट एलोकेशन फंड, मल्टी-एसेट फंड, आर्बिट्रेज फंड और इक्विटी सेविंग फंड में निवेश कर सकता है। हाइब्रिड फंड की व्यापक श्रेणी के भीतर इन सब-कैटेगिरी को म्यूचुअल फंड स्कीम के लिए टार्गेटेड एसेट एलोकेशन रेंज के आधार पर बनाया गया है।

3) पोर्टफोलियो का डायवर्सिफिकेशन

हाइब्रिड फंड निवेश पोर्टफोलियो में ऑटोमैटिक डायवर्सिफिकेशन प्रदान करते हैं, ऐसे फंड इक्विटी और डेट पोर्टफोलियो में अलग-अलग विविधता ला सकते हैं। जैसे हाइब्रिड फंड सिंगल म्यूचुअल फंड योजना के भीतर पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन पर कब्जा करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

4) इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग

अगर कोई निवेशक इक्विटी और डेट स्कीम के माध्यम से अलग-अलग एसेट एलोकेशन रखता है, तो उसे अपनी एसेट एलोकेशन स्ट्रेटेजी के अनुसार समय-समय पर निवेश पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने की जरूरत हो सकती है। इसके लिए न केवल सचेत प्रयासों और समय की आवश्यकता होती है, बल्कि निवेश पोर्टफोलियो को रीबैलेंसिंग करने के लिए किए गए रिडेम्पशन के लिए टैक्स की घटनाओं के अधीन भी हो सकता है।

इसके विपरीत, हाइब्रिड फंड निवेश पोर्टफोलियो के भीतर समय-समय पर बताए गए निवेश आदेश के अनुसार एसेट एलोकेशन को रीबैलेंस करते हैं। विशेष रूप से निवेश पोर्टफोलियो को रीबैलेंसिंग करने के लिए निवेशक से किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।

5) हाइब्रिड फंड में निवेश

एक निवेशक ग्रोथ ऑप्शन या 'पेआउट ऑफ इनकम डिस्ट्रीब्यूशन कम कैपिटल विदड्रॉल' ऑप्शन (जिसे पहले डिविडेंड ऑप्शन कहा जाता था) में निवेश कर सकता है। फंड द्वारा प्राप्त लाभ को ग्रोथ ऑप्शन के तहत योजना में फिर से निवेश किया जाता है, जबकि इस तरह के मुनाफे को पेआउट विकल्प के तहत डिस्ट्रीब्यूट किया जा सकता है।

कोई भी आधिकारिक स्वीकृति के किसी भी पॉइंट पर एप्लीकेशन फार्म जमा करके या फंड हाउस की वेबसाइट / मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से निवेश करके हाइब्रिड फंड में निवेश कर सकता है।

6) हाइब्रिड फंड से रिटर्न का कराधान

ऐसे हाईब्रिड फंड्स जिनमें कुल एस्सेट एलोकेशन का 65% ईक्विटी क्लास में निवेश किया जाता है उन पर ईक्विटी म्यूचल फंड्स की तरह ही कर लगाया जाता है। यदि ईक्विटी एस्सेट में 65% से कम आंवटन किया गया है, तो कर की गणना के लिए ऐसे फंड्स को डेट फंड माना जाता है। ईक्विटी-ओरिएंटेड हाईब्रिड फंड्स में एक वित्तीय वर्ष के दौरान 1 लाख रूपये तक के दीर्घकालिक पूंजी लाभ (LTCG) को कर से छूट प्रदान की गई है और 1 लाख रूपये से अधिक पर 10% की दर से कर लगाया जाता है। ईक्विटी-ओरिऐंटेड हाईब्रिड फंड्स पर अल्पकालिक पूंजी लाभ (STCG) पर 15% की दर से कर लगाया जाता है। डेट-ओरिऐन्टेड हाईब्रिड फंड्स पर एलटीसीजी पर 20% की दर से कर लगाया जाता है, और साथ ही इंडेक्सेशन लाभ भी प्रदान किया जाता है, जबकि एसटीसीजी पर निवेशक पर लागू होने वाली टैक्स स्लैब दर के अनुसार कर लगाया जाता है।

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