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वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ITR दाखिल कर दिया? अब यहां जानिए इनकम टैक्स रिफंड के पांच नियम

Ankit Singh
5 Aug 2022 4:27 AM GMT
वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ITR दाखिल कर दिया? अब यहां जानिए इनकम टैक्स रिफंड के पांच नियम
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आयकर अधिनियम की धारा 234D कर-भुगतान करने वाले व्यक्तियों को दिए गए अतिरिक्त रिफंड पर ब्याज लगाने का प्रावधान करती है। ITR रिफंड दाखिल करते समय टैक्सपेयर को इन पांच बिंदुओं को जानना चाहिए।

असेसमेंट ईयर 2022-23 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि बीत चुकी है, और जिन व्यक्तियों ने 31 जुलाई, 2022 को या उससे पहले अपना आई-टी रिटर्न पूरा कर लिया है, उन्हें या तो पहले ही अपना ITR रिफंड प्राप्त हो चुका है या अभी भी उनका इंतजार है। हालांकि, जो अर्जक दिए गए समय के भीतर अपना आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा से चूक गए हैं, वे अभी भी 31 दिसंबर, 2022 से पहले लेट फीस के साथ अपना आई-टी रिटर्न दाखिल करके रिफंड का रिक्वेस्ट कर सकते हैं। लेकिन ऐसे करदाताओं को देय तिथि चूकने के परिणाम भुगतने होंगे और 1 अप्रैल, 2022 से उनके ITR रिफंड पर ब्याज नहीं मिलेगा।

ITR रिफंड पर ब्याज की गणना कैसे की जाती है?

ITR Refund पर ब्याज की गणना मासिक आधार पर 0.50 प्रतिशत की दर से की जाती है। साथ ही, आयकर अधिनियम की धारा 234D कर-भुगतान करने वाले व्यक्तियों को दिए गए अतिरिक्त रिफंड पर ब्याज लगाने का प्रावधान करती है। ITR रिफंड दाखिल करते समय पांच बिंदुओं को जानना चाहिए-

ITR रिफंड दाखिल करते समय इन 5 पॉइंट को समझें

  1. एलिजिबिलिटी - टैक्स पेमेंट करने वाले व्यक्ति देय तिथि के भीतर या उसके बाद ITR दाखिल करने के लिए ITR रिफंड प्राप्त करने के पात्र हैं।
  2. ITR रिफंड पर ब्याज - अगर किसी करदाता ने 31 जुलाई, 2022 की दी गई नियत तारीख के भीतर आईटीआर दाखिल किया है, तो उसे 1 अप्रैल, 2022 से ब्याज मिलेगा।
  3. ITR रिफंड पर ब्याज दर - वे व्यक्ति जो अपना ITR देय तिथि तक दाखिल करते हैं। ITR रिफंड राशि पर 0.50 प्रतिशत मासिक ब्याज के लिए पात्र हैं।
  4. ITR रिफंड पर टैक्सेशन रूल - आयकर रिटर्न (ITR) पर रिफंड अमाउंट वह इनकम है जिसे करदाता ने संबंधित वित्तीय वर्ष में पहले ही रिपोर्ट कर दिया है। तो, ITR रिफंड अमाउंट नॉन-टैक्स योग्य है। हालांकि, ITR रिफंड अमाउंट पर अर्जित ब्याज कर योग्य है।
  5. ITR रिफंड पर ब्याज की गणना - ITR रिफंड पर ब्याज दर की गणना धारा 234डी के तहत की जाती है। नतीजतन, ITR रिफंड पर ब्याज की गणना करते समय, एक महीने के किसी भी अंश को एक महीने के रूप में माना जाता है, जबकि सौ रुपये के किसी भी अंश को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आप 4 महीने और 12 दिनों की अवधि के लिए 2,587 रुपये के ब्याज की गणना करना चाहते हैं, तो 100 रुपये के किसी भी अंश को अनदेखा करना होगा, इसलिए हम 2,578 रुपये में से 87 रुपये को अनदेखा कर देंगे और शेष 2,500 रुपए आ जाएगा। इस प्रकार, ब्याज की गणना 2,500 रुपये पर की जाएगी। इसके अलावा, 12 दिनों की अवधि को पूरा महीना माना जाएगा और इसलिए, ब्याज की गणना 5 महीने के लिए की जाएगी।

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