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Bank Locker Rules: बैंक लॉकर में अपना कीमती सामान रखने से पहले अच्छे से समझ लें क्या है नियम

Ankit Singh
7 Feb 2022 10:53 AM GMT
Bank Locker Rules: बैंक लॉकर में अपना कीमती सामान रखने से पहले अच्छे से समझ लें क्या है नियम
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Rules for Bank Lockers: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार अगर आप लंबे समय तक बैंक लॉकर का उपयोग नहीं करते हैं, तो ऐसे में बैंक आपके लॉकर में सेंध लगा सकता है। ऐसे में आइए जानते है बैंक लॉकर के कुछ खास नियम।

Bank Locker Rules: भारतीय घरों में सोने और चांदी में निवेश करने की एक पुरानी परंपरा है। घर में सोना-चांदी का कीमती सामान रखना कई बार खतरनाक हो सकता है। ऐसे में आप इन कीमती सामानों को सुरक्षित रखने के लिए बैंक द्वारा दी गई लॉकर सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

Bank Locker के आपको रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा करना होता है। इसके लिए कुछ शर्तों को पूरा करना होगा जैसे कि लॉकर प्राप्त करने वाले की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। इसके साथ ही कुछ बैंक लॉकर सेवा देने से पहले आपसे सेविंग एकाउंट खोलने के लिए कह सकते हैं। इसके साथ ही आप अपनी सुविधानुसार Locker का चुनाव कर सकते हैं। इसके लिए आपके पास नॉमिनेशन या ज्वाइंट ओनरशिप होनी चाहिए।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार Bank Lockers की सुरक्षा की जिम्मेदारी बैंकों की होती है। बैंक में डकैती, चोरी, आग आदि जैसी स्थितियों में इसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक की होती है।

चोरी या कोई नुकसान होने की स्थिति में ग्राहक को लॉकर के किराए का 100 गुना तक का भुगतान करना होगा। वहीं प्राकृतिक आपदा जैसे भूकंप, बाढ़ आदि की स्थिति में बैंकों को किसी प्रकार का मुआवजा नहीं देना होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस के मुताबिक अगर आप लंबे समय तक बैंक लॉकर का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो ऐसे में बैंक आपके लॉकर में सेंध लगा सकता है। यह अधिकार उस स्थिति में लागू होता है जब लॉकर शुल्क का भुगतान नियमित आधार पर नहीं किया जाता है। अगर आप 7 साल तक बैंक लॉकर का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो बैंक लॉकर तोड़ सकता है। साथ ही इसमें रखा सामान मालिक को दिया जाएगा।

बैंक के लॉकर नियमों के मुताबिक बैंक लॉकर तोड़ने से पहले ग्राहक से संपर्क करने की कोशिश करता है। ग्राहक से SMS, कॉल और लेटर के जरिए संपर्क किया जा सकता है। इसके बाद भी अगर कोई जवाब नहीं आता है तो बैंक की ओर से अखबार में नोटिस जारी किया जाता है कि ग्राहक बैंक आकर लॉकर को अनलॉक करें।

अगर इन तमाम कोशिशों के बाद भी ग्राहक लॉकर खोलने नहीं आता है तो बैंक गवाहों की मौजूदगी में लॉकर खोल सकता है। पूरी प्रक्रिया में एक बैंक अधिकारी और दो स्वतंत्र लोग शामिल होंगे। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिग की जाती है और लॉकर में मिले सामान को एक लिफाफे में बंद करके फायरप्रूफ लॉकर में रखा जाता है। इसके बाद ग्राहक या उसके नामांकित व्यक्ति को सारा सामान वापस कर दिया जाता है।

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