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Types of Stock in Hindi | स्टॉक कितने प्रकार के होते है? | Different Types of Stock in Hindi

Ankit Singh
28 April 2022 8:11 AM GMT
Types of Stock in Hindi | स्टॉक कितने प्रकार के होते है? | Different Types of Stock in Hindi
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Types of Stock in Hindi: अगर आप भी शेयर मार्केट में निवेश करने का प्लान बना रहे है तो पहले यहां समझ लें कि स्टॉक कितने प्रकार के होते है? यहां उन सभी कैटेगिरी के साथ स्टॉक के प्रकारों का डिटेल दिया गया है, जिसमें वह आते है।

Types of Stock in Hindi: आप अक्सर निवेश करने के लिए उपयुक्त कंपनियों के बारे में सोचते होंगे, अपनी पसंद को आसान बनाने के लिए शेयरों (Stocks) को कई कैटेगिरी में विभाजित किया जाता है। कंपनी के आकार, डिविडेंट पेमेंट, इंडस्ट्री, रिस्क, अस्थिरता, बुनियादी बातों आदि जैसे पैरामीटर पर स्टॉक को कई कैटेगरी में वर्गीकृत किया जाता है।

अगर आप भी शेयर मार्केट में निवेश करने का प्लान बना रहे है तो पहले यहां समझ लें कि स्टॉक कितने प्रकार के होते है? यहां उन सभी कैटेगिरी के साथ स्टॉक के प्रकारों का डिटेल दिया गया है, जिसमें वह आते है।

स्वामित्व के आधार पर (Based on Ownership)

ओनरशिप के संदर्भ में, शेयरों को दो कैटेगिरी में वर्गीकृत किया जाता है।

1) प्रिफर्ड स्टॉक (Preferred Stock)

Preferred Stock स्टेकहोल्डर को एक निश्चित लाभांश की गारंटी देते हैं। इस वजह से इन शेयरों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं है। हालांकि, प्रिफर्ड स्टॉक स्टेकहोल्डर को मतदान का अधिकार नहीं देते हैं।

लेकिन प्रिफर्ड स्टॉक के मालिक होने का फायदा यह है कि परिसमापन (Liquidation) की स्थिति में, प्रिफर्ड शेयरहोल्डर को आम शेयरहोल्डर से पहले भुगतान किया जाता है।

कंपनी के पास किसी भी समय प्रीमियम के साथ शेयरधारकों से प्रिफर्ड शेयर वापस खरीदने का विकल्प है। फिक्स्ड इनकम चाहने वाले निवेशकों को Preferred Stock में निवेश करना चाहिए।

2) कॉमन स्टॉक (Common Stock)

जब हम सामान्य रूप से स्टॉक का उल्लेख करते हैं, तो वे कॉमन स्टॉक होते हैं। अधिकांश स्टॉक इस रूप में जारी किए जाते हैं।

निवेशकों के पास मतदान का अधिकार होता है और वे कंपनी द्वारा लिए गए प्रमुख निर्णयों का हिस्सा हो सकते हैं। मूल्य अस्थिरता अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन निवेशक लॉन्ग टर्म कैपिटल ग्रोथ का आनंद ले सकते हैं।

हालांकि, कंपनियां आम शेयरहोल्डर को लाभांश का भुगतान कर सकती हैं या नहीं भी कर सकती हैं। इसके अलावा, परिसमापन की स्थिति में आम स्टॉक रखने वाले निवेशक भुगतान के लिए अंतिम पंक्ति में होते हैं।

मार्केट कैप के आधार पर स्टॉक (Stocks Based on Market Cap)

अगर हम मार्केट कैपिटलाइजेशन को ध्यान में रखते हैं, तो शेयरों को तीन कैटेगरी में विभाजित किया जाता है -

1) लार्ज कैप (Large Cap)

जिन कंपनियों को मार्केट कैपिटलाइजेशन 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का होता है वह लार्ज-कैप ब्रैकेट में आती है। लार्ज-कैप कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में मार्केट लीडर हैं और बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव की चपेट में नहीं आती हैं।

इनका कैश रिज़र्व अपेक्षाकृत अधिक है, लेकिन ग्रोथ धीमा होता है क्योंकि उन्होंने खुद को इस क्षेत्र में स्थापित कर लिया है। कम जोखिम वाले निवेशकों को आदर्श रूप से लार्ज-कैप शेयरों में निवेश करना चाहिए।

2) मिड कैप (Mid Cap)

जिन कंपनियों को मार्केट कैपिटलाइजेशन 7000 करोड़ रुपये से 26000 करोड़ रुपए के बीच में होता है, उन्हें मिड कैप स्टॉक कहा जाता है। मिड-कैप कंपनियां बाजार की जानी-मानी खिलाड़ी हैं, लेकिन अपने-अपने क्षेत्रों की मार्केट लीडर नहीं हैं। मिड-कैप स्पेस में स्टॉक की कीमत में उतार-चढ़ाव मध्यम है, जबकि कैश रिज़र्व मध्यम है। मध्यम जोखिम क्षमता वाले निवेशकों को मिड कैप कंपनियों में निवेश करना चाहिए।

3) स्माल कैप (Small Cap)

स्मॉल-कैप कंपनियां वे हैं जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन 7000 करोड़ रुपये से कम है। ये इस क्षेत्र के नए खिलाड़ी हैं जो खुद को स्थापित करना चाहते हैं।

ये बहुत अस्थिर स्टॉक हैं और किसी भी तरह की खबर या उनके आसपास चर्चा के प्रति संवेदनशील होते हैं। उनके कैश रिज़र्व कम हैं क्योंकि उनमें से अधिकांश व्यवसाय को बढ़ाने के लिए तैनात हैं। हालांकि, उनके बढ़ने की संभावना मिड-कैप और लार्ज-कैप शेयरों की तुलना में अधिक है।

उच्च जोखिम वाले निवेशकों को कम समय में अधिक रिटर्न की तलाश में स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश करना चाहिए।

लाभांश भुगतान पर आधारित स्टॉक | Stocks based on Dividend payments

अगर आप लाभांश देने वाले शेयरों को देख रहे हैं, तो इस सेक्टर में दो केटेगरी हैं -

1) इनकम स्टॉक (Income Stock)

अगर आप लाभांश (Dividend) के माध्यम से शेयर बाजारों में निवेश करके नियमित आय की तलाश कर रहे हैं तो आपको इनकम स्टॉक में निवेश करना चाहिए। ये कंपनियां नियमित रूप से शेयरधारकों को भारी लाभांश का भुगतान करती हैं, भले ही उनकी विकास दर कम हो। इन कंपनियों में निवेश करने में न्यूनतम जोखिम शामिल होता है।

2) ग्रोथ स्टॉक (Growth Stock)

ग्रोथ स्टॉक वे होते हैं जो कम लाभांश देते हैं और लाभांश का भुगतान करने की आवृत्ति भी अनियमित होती है क्योंकि ये कंपनियां शेयरधारकों को लाभांश के रूप में भुगतान करने के बजाय कंपनी को विकसित करने में अपना लाभ निवेश करती हैं।

हालांकि उनके पास उच्च विकास संभावनाएं हैं, इन शेयरों में निवेश में शामिल जोखिम आय शेयरों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक है। जो निवेशक लंबी अवधि में अपनी संपत्ति बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें Growth Stock में निवेश करना चाहिए।

प्राइस ट्रेंड के आधार पर स्टॉक (Stocks based on price trends)

प्राइस ट्रेंड के संदर्भ में शेयरों को दो कैटेगिरी में बांटा गया है। आइए इन कैटेगिरी को गहराई से देखें।

1) चक्रीय स्टॉक (Cyclical Stock)

Cyclical Stock आर्थिक प्रवृत्तियों और व्यापक आर्थिक समाचार या जीडीपी या मुद्रास्फीति जैसे डेटा के लिए अत्यधिक मूल्य-संवेदनशील होते हैं। ये शेयर बेंचमार्क मार्केट इंडेक्स (निफ्टी 50 या सेंसेक्स) के अनुरूप चढ़ेंगे और गिरेंगे। इन शेयरों को खरीदने का एक आदर्श समय बढ़ती आर्थिक परिस्थितियों में है। Cyclical Stock का एक उदाहरण ऑटोमोबाइल स्टॉक है।

2) डिफेंसिव स्टॉक (Defensive Stock)

डिफेंसिव स्टॉक वे हैं जो अन्यथा गिरते बाजार की ट्रेंड का बचाव करते हैं, ये स्टॉक आमतौर पर ऐसे समय में बढ़ेंगे जब व्यापक बाजार रेड जॉन में हों और इसके विपरीत। ब्रॉडर इकनोमिक ट्रेंड का प्रभाव Cyclical Stock की तुलना में Defensive Stock पर अपेक्षाकृत कम है।

Defensive Stock खरीदने का एक अच्छा समय ऐसे समय में होता है जब मैक्रोइकॉनॉमिक स्थितियां आदर्श नहीं होती हैं। डिफेंसिव स्टॉक के उदाहरण एफएमसीजी/उपभोक्ता स्टेपल स्टॉक हैं।

Conclusion -

एक बार जब आप शेयर बाजारों में मौजूद स्टॉक के प्रकारों (Types of Stock in Hindi) के बारे में जान जाते हैं तो उन्हें विभाजित करना और यह समझना आसान हो जाता है कि कौन सा आपके लिए सबसे अच्छा है। अगर आपके पोर्टफोलियो में ज्यादातर तरह के स्टॉक हैं, तो यह आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

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