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फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते वक्त न करें लापरवाही, इन 6 टिप्स के जरिए चुने बेस्ट पॉलिसी

Ankit Singh
9 Jan 2022 5:03 AM GMT
फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते वक्त न करें लापरवाही, इन 6 टिप्स के जरिए चुने बेस्ट पॉलिसी
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Family Health Insurance: बाजार में उपलब्ध ढेरों हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में से सही पॉलिसी चुनना एक कठिन काम हो सकता है। इस कारण कई बार लोग अपर्याप्त कवरेज के साथ गलत हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीद लेते हैं। इस लेख में आगे हमने विस्तार से बतएंगे की बढ़िया फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस का चुनाव कैसे करें।

Family Health Insurance Plans: हर कोई चाहता है कि उसके पास एक ऐसा हेल्थ इंश्योरेंस प्लान हो जो उन्हें और उनके परिवार को अधिकतम कवरेज प्रदान करे। बाजार में उपलब्ध ढेरों हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में से सही पॉलिसी चुनना एक कठिन काम हो सकता है। ज्ञान के अभाव के कारण कई बार लोग अपर्याप्त कवरेज के साथ गलत हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीद लेते हैं। इस लेख में आगे हमने विस्तार से बतएंगे की बढ़िया फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस का चुनाव कैसे करें। यहां हम आपको 6 सिंपल टिप्स के जरिए बताने जा रहे है कि भारत में मिलने वाले बेस्ट फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस का चयन कैसे करें।

1. सही पॉलिसी कवरेज की तलाश करें

एक ऐसी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी चुनें जो अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के सभी खर्चों को कवर करें। जैसे एम्बुलेंस शुल्क, कैशलेस उपचार, मैटरनिटी बेनिफिट्स, डेली हॉस्पिटल कैश बेनिफिट आदि। परिवार के लिए हेल्थ प्लाज खरीदते समय एक व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि योजना प्रत्येक बीमित सदस्य की जरूरतों को पूरा करती है।

विभिन्न योजनाओं की तुलना करें, नीति की सीमाओं और विशेषताओं की जाँच करें और फिर अपनी आवश्यकता के अनुसार योजना चुनें। कई बार पॉलिसी खरीदते वक़्त अधिकतर लोग वेटिंग पीरियड, सब लिमिट जैसे फीचर पर ध्यान नहीं देते। इसलिए पॉलिसी ब्रोशर को अच्छी तरह से पढ़ना जरूरी है ताकि क्लेम करते वक्त फैमिली को किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।

2. वेटिंग पीरियड क्लॉज की जांच करें

आमतौर पर अधिकतर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी 2-4 साल के वेटिंग पीरियड के बाद मैटरनिटी एक्सपेंस, पहले से मौजूद बीमारी, हर्निया आदि जैसे बीमारियों का कवर देती है। एक प्लान का वेटिंग पीरियड अलग अलग बीमाकर्ता के लिए अलग अलग हो सकता है।

बीमाकर्ता के लिए भिन्न होती है। उदाहरण के लिए मैटरनिटी खर्च आमतौर पर पॉलिसी शुरू होने की तारीख से 2-4 साल की प्रतीक्षा अवधि के बाद कवर किया जाता है।

कई बीमा कंपनियां कम प्रतीक्षा अवधि भी प्रदान करती हैं। इस प्रकार उस अवधि की जांच करना सुनिश्चित करें जिसके बाद परिवार फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में पहले से मौजूद बीमारी को कवर किया जाएगा और वह प्लान चुनें जो सबसे कम वेटिंग पीरियड के साथ आता हो।

3. फ्लेक्सिबल पॉलिसी वाला प्लान चुने

फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय पॉलिसी खरीदार को सरल और परेशानी मुक्त तरीके से परिवार के नए सदस्यों को जोड़ने के विकल्पों की जांच करनी चाहिए। अगर परिवार का कोई वरिष्ठ सदस्य अब कवरेज के लिए पात्र नहीं है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो परिवार के अन्य सदस्य योजना के लाभों से समझौता किए बिना उसी योजना को जारी रख सकते हैं।

4. लाइफटाइम रिन्यूएबिलिटी प्लान चुनें

बढ़िया हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय विचार करने के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। पॉलिसी के कार्यकाल की जांच करना महत्वपूर्ण है। हेल्थ प्लान लाइफटाइम रिन्यूएबिलिटी प्रदान करती है या लिमिटेड लाइफटाइम रिन्यूएबिलिटी, यह जांचना जरूरी है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि जीवन के बाद के चरण के दौरान हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। इसलिए हमेशा एक ऐसे हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी चुनने की सलाह दी जाती है जो लाइफटाइम रिन्यूएबिलिटी के ऑप्शन के साथ आती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आयु सीमा पार करने के बाद भी परिवार को आने वाले वर्षों में समान कवरेज मिले।

इसके अलावा यह नई पॉलिसी खरीदने के झंझट से भी बचाता है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति ऐसा हेल्थ इंश्योरेंस खरीदता है जो 45 वर्ष तक रिन्यूएबिलिटी प्रदान करती है, तो 45 वर्ष पूरे होने के बाद पॉलिसीधारक को बहुत अधिक प्रीमियम दर के साथ एक नई योजना खरीदने की आवश्यकता होगी। दूसरी ओर यदि कोई लाइफटाइम रिन्यूएबिलिटी प्लान खरीदता है, तो वह पॉलिसी रिन्यूएबिलिटी के झंझट में पड़े बिना उसी योजना को जारी रख सकता है।

5. को-पेमेंट क्लॉज की जांच करें

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में को-पेमेंट का मतलब यह होता है कि पॉलिसीधारक हेल्थ खर्च का कुछ प्रतिशत अपनी जेब से खर्च करेगा। मान लीजिए कि किसी व्यक्ति ने 10 पेरसेंट को-पेमेंट क्लॉज के हेल्थ इंश्योरेंस खरीदा है तो 1 लाख का क्लेम करते वक्त उस व्यक्ति को अपनी जेब से 10 हजार रुपये का भुगतान करना होगा और शेष 90 हजार रुपये का भुगतान बीमा कंपनी करेगी। इसकिए ऐसी पॉलिसी चुनने की सलाह दी जाती है जिसमें को-पेमेंट क्लॉज न हो। ऐसी कई बीमा कंपनियां है जो 100 पेरसेंट कवर देती है।

6. कमरे के किराए की सीमा

किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में जब बीमार व्यक्ति को हॉस्पिटल में भर्ती किया जाता है तो हेल्थ इंश्योरेंस के अनुसार ही उसे कमरा भी दिया जाता है। आपके हेल्थ इंश्योरेंस के अनुसार आपको शेयर्ड रूम, सेमी प्राइवेट रूम या प्राइवेट रूम दिया जाएगा। हमेशा प्लान खरीदते वक्त यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बीमार पड़ने पर बीमा कंपनी एक बढ़िया हॉस्पिटल प्रदान कराए जिसमें एक बढ़िया प्राइवेट रूम हो।

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