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इस पत्थर को पाकर आप बन सकते है करोड़पति।

Janprahar Desk
1 July 2020 10:12 PM GMT
इस पत्थर को पाकर आप बन सकते है करोड़पति।
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दुनिया में क्या कभी किसी ऐसे पत्थर की कल्पना की जाती है जिसे छूने से लोहा सोना बन जाता है। इस पत्थर को पारस कहते हैं अनेक बाते  इसके संबंध में चली आई है कोई कहता है कि पहाड़ों पर कहीं होता है पहाड़ी चरवाहे बकरियों के पूर्व में लोहे की नाल ठोक दिया करते थे जो कभी  पारस के ऊपर होकर निकल जाती तो  लोहे की सोने को हो जाती है सोच कर।

कथाकारों ने भी इस संबंध में कई कहानियां कही है  राजा चंदेल के यहां पारस था ऐसा कहा जाता है इन सब बातों में कितना सत्य है यह जानना कठिन है पर इतना निर्विवाद रूप से कहा जा सकता हैइस युग में  विज्ञान फौजियों को अभी तक इस प्रकार की किसी वस्तु का संसार भर में पता नहीं लगा है। जिसे छूने से लोहा सोना बन जाता है बहुत से लोग पारस पत्थर की तलाश में रहते। जिसके बाद वे आसानी से पर्याप्त सुख समृद्धि पा सके लेकिन असल में ऐसा अभी तक हो नहीं  पाया।

आमिर बनने की इच्छा किसकी नहीं  होती लेकिन हर आदमी अमीर नहीं बन सकता।ज़रा सोचिये कोई आपको बोले किआप चंद सेकेंड में बिना कुछ किया अमीर बन सकते हैं तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी अगर आपको पता चले कि 1 मिनट में करोड़पति आपको कोई रहस्य नहीं बल्कि छोटा सा पक्षी बनाएगा सुनने में आप अचंभित हो जाए लेकिन इस पक्षी का नाम है टिटहरी।

ऐसी मान्यता है कि जिस दिन टिटहरी पेड़ पर रहने लगे तब धरती पर भूकंप आ जाएगा। टिटहरी कभी भी वृक्ष पर अपना घर नहीं बनाते वह भूमि पर ही अंडे देती है और भूमि पर ही रहती है। कोई भी अन्य पक्षी जब अंडा देता है तो उस पर बैठकर उसको गर्म करके उसको तोड़ता है लेकिन ये सबसे अलग है और ऐसा बिल्कुल भी नहीं करता है कहा जाता है कि टिटहरी जब भी ज़मीन पर अंडा देता है तो उसे तोड़ने के लिए उसको पारस पत्थर की जरूरत पड़ती है।

कहा जाता है कि अगर पारस  लोहे को छू ले तो सोना बन जाता है आपको बता दें कि रहस्यमई पत्थर है जो हर किसी को आसानी से नहीं मिलता लेकिन टिटहरी पता नहीं कहां से और अपने कौनसे-सेंस से इस  पारस पत्थर को खोज लेती है और उसी से अपने अंडे तोड़ती है इसीलिए इस पक्षी का मिल जाना बहुत बड़ी बात होगी।

शास्त्रों की कहानियां बता दी कि हिमालय के जंगल में बड़ी आसानी से पारस मणि मिल जाती थी बस कोई व्यक्ति की पहचान करना जानता हो तो।

कहानियों के अंदर जिक्र आता है की कई संत पारस मणि खोजकर लाते थे और अपने भक्तों को दे दिया करते थे।

लेकिन ऐसा कहा जाता है की टिटहरी के अंदर एक ऐसा सेंस होता है जिससे वो पारस पत्थर को खोज लेती  है और उसी से अपने अंडे तोड़ दिए जाते हैं।

चलिए जानते है टिटहरी पक्षी के बारे में।  ये एक ऐसा पक्षी है जो उड़ता कम है अपना अधिकांश समय तालाबों और झीलों के नजदीक गुजरता है। भारत के कई प्रदेश में ये  पाई जाती है इसका नाम लैपिंक है उसकी दो तीन प्रजाति देश में पाई जाती है।

ये एक  चौकना पक्षी है ये अपने नजदीक आने वाले जानवर कुत्ते बिल्ली तेरी मनुष्य को देखकर शोर मचाना शुरू कर देता है। ये  दिन रात जागकर अपने अंडे और बच्चों की देखभाल करता है मार्च से अगस्त महीने के बीच २-३ या  4 अंडे देती है

इनके अंडो का रंग  मिट्टी के रंग से मिलता-जुलता होता है ऐसे लोगों की नजर इनके अंडो पर नहीं पड़ती है और कहा जाता है कि ये ऐसे ही किसी पारस पत्थर का इस्तेमाल करती है अपने अंडो को तोड़ने के लिए। इनके  बच्चों का रंग भी धरती के रंग सा ही होता है मादा टिटहरी और नर टिटहरी दोनों मिलकर बच्चों का पालन पोषण करते हैं। हमारे देश में टिटिहरी की प्रजाति कगार पर है।

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज ने 2006 को जारी किए रेड डाटा बुक में लुप्तप्राय प्रजातियों का उल्लेख करते हुए टिटहरी  को इसी श्रेणी में रखा। भारत के मैदानी इलाकों में लंबी टांगों वाला ये पक्षी अपना भोजन तलाश करते हुए अपना गुजरा करता है।

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