What is Uniform Civil Code in Hindi : क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड? विस्तार से जानिए

 
Uniform civil code in hindi

शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान ने जज ने कहा, अब देश में समान नागरिकता  संहिता (Uniform Civil Code) को लागू करने का समय आ गया है। केंद्र सरकार को इस बारे में जल्द ही विचार करना चाहिए। अब ऐसे में आपके मन में भी सवाल उठ रहा होगा कि Uniform Civil Code है क्या? तो चलिए आपको विस्तार से बताते है।

Uniform Civil Code बताने से पहले आपको बता दें कि शुक्रवार को मीणा जनजाति के एक महिला और उसके हिंदू पति के बीच तलाक की सुनवाई चल रही थी। दरअसल फैमिली कोर्ट में महिला के पति ने तलाक की याचिका दायर की थी। लेकिन पत्नी ने इस याचिका को खारिज करने के लिए कहा था कि वह मीणा जनजाति से है, ऐसे में उस पर हिन्दू मैरिज एक्ट लागू नहीं होता। 

उसके पति ने हाईकोर्ट में पत्नी की इसी दलील के खिलाफ याचिका लगाई थी। पति हिन्दू मैरिज एक्ट के हिसाब से तलाक चाहता था। इसी सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अब देश में Uniform Civil Code को लागू करने की जरूरत है। तो आइए जानते है इसके बारे में...

What is Uniform Civil Code? | क्या है समान नागरिकता संहिता

समान नागरिक सहिंता (Uniform Civil Code) का मतलब होता है कि देश के हर व्यक्ति के लिए एक जैसा कानून हो चाहे वह किसी भी मजहब या तबके के हो। इस मुद्दे पर काफी अरसे से बहस होती आई है लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया का सका है।

भारत में अभी भी अलग-अलग समुदायों और मजहब के लिए विभिन्न कानून है। खासकर शादी, तलाक और जमीन-जायदाद के लिए अलग कानून प्रक्रिया होती है। इसे पर्सनल लॉ कहा जाता है। संवैधानिक रूप से हम अपने आपको धर्मनिरपेक्ष देश कहते हैं, लेकिन हमारे ही देश के कानून में धर्म के हिसाब से भेदभाव होता है। 

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संविधान में आर्टिकल 36 से 51 तक राज्यों को विभिन्न अलग मुद्दों पर सुझाव दिए गए है और उम्मीद जताई गई है कि नीतियां इसी में मिताबिक तय करेगी। इन्ही में आर्टिकल 44 का जिक्र किया गया है। आर्टिकल 44 के अंतर्गत सही वक्त आने पर सभी मजहब के लिए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) बनाने की बात कही गई है।

संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड एक सेकुलर का दर्जा दिया गया है जो सभी जाति या धर्म के लोगों को एक समान कानून का अधिकार देता है। फिलहाल में भारत में हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग हिंदू पर्सनल लॉ के तहत अपना निपटारा करते है। जबकि मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय के अपने पर्सनल लॉ हैं। 

भारत में ईस तरह के बढ़ते मामलों को देखकर उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही Uniform Civil Code को लागू किया जा सकता है।

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