Shaheed Diwas 2021: क्यों हुई थी भगत सिंह को फांसी? Why was Bhagat Singh hanged? 

आज़ादी की लड़ाई में अपनी जान गवाने वाले कुछ महान क्रांतिकारी में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का नाम हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने अपनी देश के नाम अपनी जान दे दी। लेकिन आखिर क्यों हुई थी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी? Shaheed Diwas Importance in Hindi। 
 
Shaheed Diwas 2021: क्यों हुई थी भगत सिंह को फांसी? Why was Bhagat Singh hanged?


हमारे देश को स्वतंत्र हुए लगभग 74 साल होने वाले हैं और हम एक आजाद भारत में सांस ले सकते हैं। हालांकि आजादी इतनी आसान नहीं थी। हमें आजादी दिलाने में बहुत से लोगों का हाथ था जिन्होंने अपनी जान पर खेलकर आजादी की लड़ाई लड़ी और देश को अंग्रेजों से मुक्त करवाया। ऐसे ही कुछ महान क्रांतिकारी (Indian freedom fighters) जिन्होंने देश की आजादी पर अपना जीवन त्याग दिया। उसमें भगत सिंह (Bhagat Singh), सुखदेव (Sukhdev) और राजगुरु (Rajguru) शामिल थे। इन तीनों शहीदों को फांसी की सजा सुनाई गई थी और उन्होंने यह भी खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया था। फांसी के दिन भी उनके चेहरे पर एक देश के लिए मर मिटने का जज़बा दिख रहा था।

23 मार्च 1931 के दिन (Bhagat Singh hanging date) अंग्रेजों द्वारा उन्हें फांसी की सजा दी गई थी। इस दिन को हर साल हम शहीद दिवस (Shaheed Diwas date) के रूप में मनाते हैं जिस दिन हम उन शहीदों को याद करते हैं और उनके बलिदान को नमन करते हैं। लेकिन आखिर किस वजह से उन्हें दी गई थी फांसी? Why was Bhagat Singh hanged? Bhagat Singh ko fansi kyu hui thi?

  • Why was Bhagat Singh hanged? Bhagat Singh ko fansi kyu hui thi? भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी

Bhagat Singh, rajguru और sukhdev ने 1928 में लाहौर में एक ब्रिटिश जूनियर पुलिस अधिकारी जॉन सांडर्स (John Saunders) की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा उन्होंने Central Assembly पर बम भी फेंका था जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था जिसके बाद उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी।
Why was Bhagat Singh hanged?
जेल में रहते हुए भी भगत सिंह का क्रांतिकारी विचार बरकरार रहा। वहां रहकर उन्होंने कई किताबें पढ़ी और साथ ही कई किताबें लिखी जो उनके क्रांतिकारी विचारों के दर्पण है (Books of Bhagat Singh)। जेल में रहते वर्क उनके द्वारा लिखी गई किताबों का आज भी बहुत महत्वपूर्ण है। जेल में रहते दौरान 23 मार्च 1931 को Lahore Central Jail में फांसी दे दी गई। फांसी की तारीख 24 मार्च दे दी गई थी लेकिन फांसी को लेकर चल रहे प्रदर्शन और विरोध से डरे हुए अंग्रेजों ने उन्हें 11 घंटे पहले 23 मार्च को फांसी दे दी।
  • फांसी से पहले भगत सिंह ने क्या कहा? What did Bhagat Singh say before his hanging?

फांसी का समय आने पर भगत सिंह ने जेल अधिकारियों को कहा, "ठहरिए! पहले एक क्रांतिकारी दूसरे से मिले तो ले।" इसके बाद उन्होंने अपनी किताब छत की और उछाल दिया और कहा "ठीक है अब चलो"। फांसी पर जाते समय भी तीनों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु मस्ती में गाना गाते हुए जा रहे थे।
ऐसे ही क्रांतिकारियों के बलिदान को हम कभी नहीं भूल सकते हैं जिन्होंने हमारे देश की आजादी के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं थी। आज उनके सामने सम्मान से हमारा सिर झुकता है। 

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